नई दिल्ली. (शेखर घोष ) भारतीय रेलवे ने देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच एक ऐसा बेहद सस्ता वेंटिलेटर तैयार किया है, जो लोगों की जान बचाने में उपयोगी हो सकता है। इस सस्ते वेंटिलेटर को ‘जीवन’ नाम दिया गया है और इसे कपूरथला रेल डिब्बा कारखाना ने विकसित किया है। इसको तैयार करने में महज 10 हजार रुपए खर्च आया है। इस पोर्टेबल वेंटिलेटर की खासियत यह है कि पूरी तरह से साउंडलेस है और कहीं भी ले जाया सकता है। आईसीएफ ने इस वेंटिलेटर के को पहले परीक्षण के लिए भारत सरकार के इंडियन कांउसिल आफ रिर्सच के पास भेज दिया है।
उत्तर रेलवे का कहना है कि इंडियन कांउसिल ऑफ रिसर्च से इस वेंटिलेटर की मंजूरी मिलने के बाद देश में वेंटिलेटरों की भारी कमी को देखते हुए बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जाएगा। ब्रूकिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में जीवनरक्षक वेंटिलेटर की भारी कमी है। फिलहाल देश में उपलब्ध वेंटिलेटर की अधिकतम संख्या 57 हजार है। अगर इसी तरह से कोरोना का संक्रमण फैलता रहा तो 15 मई तक एक लाख से 2 लाख वेंटिलेटरों की अावश्कता पड़ सकती है। वेंटिलेटरों की कीमत पांच लाख रुपए से 15 लाख रुपए तक है।
इस तरह से वेंटिलेटर करता है काम
आईसीएफ के जीएम ने बताया कि इसमें मरीज के सांस को चलाने के लिए एक वॉल्व लगाया गया है। जरूरत के हिसाब से इसके आकार में बदलाव किया जा सकता है। यह बिना आवाज किए चलता है।
पीपीई सूट को डीआरडीओ की हरी झंडी
रेलवे ने कोरेना वायरस से बचाव के लिए उत्तर रेलवे की यमुनानगर जगाधरी वर्कशाप के इंजीनियरों ने काेरोना के जांच के लिए डॉक्टरों के काम आने वाला पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) सूट का डिजायन कर डीआरडीओ के पास भेजा था। डीआरडीओ ने इस शूट को पास कर दिया है। अब उत्तर रेलवे इस पीपीई सूट को डीआरडीओ की मंजूरी के साथ अन्य यूनिटों में भी तैयार करेगा ताकि इसे बाजार में भी उपलब्ध कराया जा सके।